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शिमला: वन निगम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण की उम्मीद बढ़ी, 10 मुद्दों पर प्रबंधन और महासंघ में चर्चा

➤ अक्तूबर 2026 तक नियमितीकरण के आदेश जारी होने की उम्मीद

➤ कर्मचारियों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चा

➤ स्टाफ की कमी दूर कर आरएंडटी फैक्ट्रियों को तीन शिफ्ट में चलाने की तैयारी


शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य वन निगम के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण को लेकर उम्मीद बढ़ी है। बुधवार को राज्य वन निगम कर्मचारी महासंघ और निगम प्रबंधन के बीच हुई बैठक में कर्मचारियों से जुड़े 10 महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का नियमितीकरण प्रमुख मुद्दा रहा। निगम के प्रबंध निदेशक संजय सूद ने आश्वासन दिया कि संबंधित स्क्रीनिंग समितियों की रिपोर्ट जल्द निगम मुख्यालय भेजने के लिए डीएम और जीएम को निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाकर अक्तूबर 2026 तक नियमितीकरण के आदेश जारी करने का प्रयास किया जाएगा। महासंघ ने इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मांग की कि लंबित प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

बैठक में महासंघ ने कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों को प्रबंधन के सामने रखा। महासंघ के अध्यक्ष प्रीतम पाल ठाकुर के अनुसार, निगम प्रबंधन ने कर्मचारियों के लंबित मामलों के समाधान के लिए समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया है। बैठक में नियमितीकरण के अलावा ईपीएफ वेतन सीमा, कर्मचारियों की कमी, प्रशिक्षण और टिंबर मैनुअल से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर महासंघ ने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल उसका मुख्य मुद्दा है। महासंघ की ओर से मांग रखी गई कि संबंधित स्क्रीनिंग समितियों की रिपोर्ट जल्द मंगवाई जाए और इसके आधार पर नियमितीकरण की प्रक्रिया में किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो। प्रबंधन की ओर से रिपोर्ट जल्द प्राप्त करने और आगे की कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन दिया गया।

बैठक में ईपीएफ वेतन सीमा बढ़ाने के मामले पर भी चर्चा हुई। प्रबंधन की ओर से बताया गया कि निगम के निदेशक मंडल के निर्णय के बाद इस संबंध में प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा चुका है। महासंघ ने इस मामले में भी आगामी कार्रवाई को जल्द पूरा करने की मांग रखी। महासंघ का कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े मामलों पर बैठक में दिए गए आश्वासनों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाना चाहिए।

बैठक में निगम की ओर से प्रबंध निदेशक संजय सूद, कार्यकारी निदेशक मीरा शर्मा और प्रबंधक प्रशासन संतोष शर्मा मौजूद रहीं। वहीं महासंघ की ओर से अध्यक्ष बाबू राम चौधरी, महासचिव विक्रांत कदशोली, संगठन सचिव अर्जुन बख्यान, कोषाध्यक्ष विकास शर्मा, आरएंडटी बिलासपुर के सचिव श्याम लाल शर्मा और शिमला आधारित यूनियन से जगदीश वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक में बिरोजा और तारपीन कारखानों में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। महासंघ की ओर से बताया गया कि कर्मचारियों की कमी के कारण फैक्ट्रियों के संचालन पर असर पड़ रहा है। प्रबंधन ने स्टाफ की कमी को दूर करने की दिशा में कार्रवाई करने की बात कही। इसके साथ ही वर्तमान में दो शिफ्ट में संचालित हो रही आरएंडटी फैक्ट्रियों को तीन शिफ्ट में चलाने की दिशा में भी कदम उठाने की बात सामने आई।

तीन शिफ्ट में फैक्ट्रियों के संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता को अहम माना जा रहा है। ऐसे में कर्मचारियों की कमी दूर करने के साथ संचालन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। बैठक में इस विषय पर भी आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही गई।

इसके अलावा फील्ड स्टाफ को आवश्यक प्रशिक्षण देने का विषय भी बैठक के एजेंडे में रहा। कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने और कामकाज में एकरूपता लाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण की आवश्यकता पर चर्चा हुई। साथ ही टिंबर मैनुअल से संबंधित विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को कार्यप्रणाली से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है।

महासंघ ने प्रबंधन से बैठक में दिए गए सभी आश्वासनों पर समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। विशेष रूप से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर महासंघ ने कहा कि आदेश जारी होने तक इस मांग को प्रमुखता से उठाया जाता रहेगा। अब संबंधित स्क्रीनिंग समितियों की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली विभागीय कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में सामने आए मुद्दों से स्पष्ट है कि वन निगम कर्मचारियों से जुड़े नियमितीकरण, ईपीएफ, स्टाफ की कमी, प्रशिक्षण और फैक्ट्री संचालन जैसे विषयों पर प्रबंधन और कर्मचारी महासंघ के बीच आगे भी समन्वय की आवश्यकता रहेगी। फिलहाल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नजर नियमितीकरण की प्रक्रिया और अक्तूबर 2026 तक आदेश जारी होने की संभावित समयसीमा पर है।